लेबनान के अल-मनार टीवी चैनल की रिपोर्ट के मुताबिक़, इस्राईली जनरल का कहना है कि हिज़्बुल्ला के साथ ज़ायोनी शासन के किसी भी संभावित युद्ध में इस्राईल को भारी नुक़सान पहुंच सकता है, इसलिए कि हिज़्बुल्लाह के पास एक लाख से भी अधिक मिसाइलों का भंडार है, जिसमें से कुछ बहुत ही सटीक रूप से अपने लक्ष्य को भेदने की क्षमता रखते हैं।
जनरल स्ट्रीक ने भी उल्लेख किया कि हिज़्बुल्लाह ने अपनी समुद्री शक्ति को बढ़ाया है और साइबर वार में उसके विशेषज्ञ निपुण हैं।
इस्राईली सेना प्रमुख का कहना था कि सीरिया युद्ध में भूमिका निभाने के कारण, हिज़्बुल्लाह की सामरिक शक्ति अभूतपूर्व रूप से मज़बूत हुई है और उसे युद्ध का काफ़ी अनुभव प्राप्त हो गया है।
स्ट्रीक ने कहा, आगामी युद्ध में ज़ायोनी शासन की उत्तरी बस्तियों को ख़ाली कराना कोई आसान काम नहीं होगा, इसलिए कि हिज़्बुल्लाह की ओर से तुरंत रूप से इन्हें निशाना बनाना आसान होगा।
ग़ौरतलब है कि यह कोई पहली बार नहीं है कि जब किसी वरिष्ठ इस्राईली सैन्य अधिकारी ने हिज़्बुल्लाह की सामरिक शक्ति का लोहा माना हो, इससे पहले भी विशेष रूप से 2006 के युद्ध के बाद, इस्राईली कमांडर और मंत्री हिज़्बुल्लाह की सैन्य शक्ति के क़सीदे पढ़ते रहे हैं।
2006 में 33 दिवसीय युद्ध में जहां इस्राईली बमबारी में दक्षिणी बेरूत समेत लेबनान के कई इलाक़ों में आधारभूत ढांचे को भारी नुक़सान पहुंचा था, वहीं हिज़्बुल्लाह के मिसाइलों ने इस्राईल में एक हड़कंप मचा दिया था।
यह युद्ध इस्राईल ने हिज़्बुल्लाह के क़ब्ज़े से अपने 6 सैनिकों को बचाने के लिए शुरू किया था, लेकिन इसका समापन इस्राईल के 118 सैनिकों की मौत पर हुआ था और इस्राईल को हिज़्बुल्लाह की कई शर्तों को स्वीकार करना पड़ा था।
इस बीच, इस्राईली सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी जनरल बीतून ने कहा है कि इस्राईली सेना, सीरिया और लेबनान में अलग-अलग मोर्चों पर युद्ध के लिए तैयार हो रही है और युद्ध की आग किसी भी क्षण भड़क सकती है।
हालांकि इस्राईली सेना में रिज़र्व फ़ोर्स के कमांडर, जनरल ब्रीक ने चेतावनी दी है कि इस्राईली सेना अगले युद्ध के लिए तैयार नहीं है।
ब्रीक ने इस्राईली सेना की कमज़ोरी पर एक ख़ुफ़िया रिपोर्ट तैयार की थी, जिसके बाद इस्राईल में हड़कंप मच गया और उसके बाद एक जांच समिति का गठन किया गया।
कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि आने वाला समय इस्राईल के लिए किसी भी तरह से अनुकूल नहीं है, इसीलिए कि इस्राईल, सीरिया और लेबनान में ईरान के प्रभाव को कम करने, हिज़्बुल्लाह और फ़िलिस्तीनी प्रतिरोधी संगठनों को कमज़ोर करने और अमरीका को ईरान से सीधे टकरा देने में बुरी तरह से विफल हो गया है।